हल्दी के दूध के दस प्रमुख लाभ और हल्दी दूध बनाने की विधि

आज भी जब हमें खांसी जुकाम बुखार या चोट लग जाती है तो हम उसका उपचार नानी मा के नुस्खो से ही करते है, ऐसे ही कुछ नुस्खो में से एक है हल्दी दूध. हल्दी और दूध का इस्तेमाल हम अपनी बीमारियों के इलाज के लिये करते है. प्राचीन काल से चला आ रहा ये घरेलू उपचार आज भी उतना ही कारगार है जितना की पहले था. हल्दी औषधीय गुणों से परिपूर्ण है और इसमे एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory), एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी कैंसर  प्रॉपर्टीज मौजूद होती है. हर घर की रसोई में हल्दी मौजूद होती है इसका इस्तेमाल हम भोजन में भी करते है. हल्दी को नेचुरल एंटी बायोटिक भी माना जाता है. हल्दी को जब दूध के साथ मिला दिया जाता है तो ये ओर भी ज्यादा गुणकारी हो जाते है. हल्दी दूध को गोल्डन मिल्क भी कहा जाता है.  हल्दी वाला दूध पीने के कई लाभ होते है, ऐसे ही कुछ लाभों को हम आपको बतायेंगे ताकि आप इससे लाभान्वित हो सके और स्वस्थ जीवन जी सके.

 

कैसे बनाये हल्दी दूध how to prepare turmeric milk in hindi

एक कप दूध ले, इसे उबालने रखे उबालते वक्त इसमें आधा चम्मच हल्दी डाले और मिलाये जब ये उबल जाये तो आपका हल्दी दूध तैयार हो गया. हल्दी दूध के लाभों को ओर बढ़ाने के लिये  उबालते हुये दूध में आधा चम्मच हल्दी के साथ ¼  यानी एक चौथाई पीसी हुई काली मिर्च और एक चौथाई घी भी डाल सकते है. काली मिर्च (black pepper) हल्दी में मौजूद रासायनिक तत्व कुरकुमीन को तेजी से शरीर में अवशोषित करने में मदद करता है. घी गले की खराश में मदद करता है. इस ड्रिंक में मीठे के लिये शहद भी मिलाया जा सकता है. शहद हल्दी दूध के गुनगुने हो जाने के बाद ही डाले.

 

हल्दी दूध के लाभ और गुण haldi milk benefits

 हल्दी दूध

 

हल्दी दूध के चिकित्सीय गुण

हल्दी दूध में कई सारे गुण होते है जैसे एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory), एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी सेप्टिक. कटने, जलने और इन्फेक्शन के समय हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. कटने या जलने पर हल्दी का पाउडर प्रभावित स्थान पर छिड़के इससे जल्दी आराम आयेगा.

 

खांसी जुकाम अस्थमा गले की खराश में आराम

खांसी, जुकाम, श्वसन पथ के संक्रमण (respiratory tract infection), गले की खराश के उपचार के लिये हल्दी दूध का प्रयोग प्राचीन समय से ही चला आ रहा है.  रात को सोने से पहले हल्दी दूध लेने से खांसी को आराम आता है और आराम दायक नींद आती है.  हल्दी के एंटी माइक्रोबियल (anti microbial) गुण वायरस और बैक्टीरिया से लड़ते है और  श्वसन पथ के संक्रमण से संबंधित बीमारियों, अस्थमा, bronchitis के उपचार में मदद करता है.  ये शरीर में गर्मी पैदा कर साइनस और लंग कनजेशन (lung congestion)  से जल्दी आराम दिलाती है. खांसी जुकाम रोकने के ओर प्रभावशाली उपायों को जानने के लिये  क्लिक करे

 

रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाये

रोजाना हल्दी दूध  का सेवन शरीर की इम्युनिटी बढाता है. ऐसे लोग जिन्हें अक्सर इन्फेक्शन से संबंधित बिमारिया हो जाती है खासकर बच्चे जिन्हें बुखार जुकाम या चिकनपॉक्स जैसी बीमारियाँ जल्दी हो जाती है उन्हें हल्दी दूध का सेवन सूबह खाली पेट और रात को सोने से पहले करना चाहिये.

 

गठिया और पेट का अल्सर

हल्दी दूध की एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टी गठिया और पेट का अल्सर से बचाने और सुरक्षित रखने में मदद करती है. हल्दी में मौजूद एंटीओक्सिडेंट गुण शरीर की कोशिकाओ को खत्म करने वाले फ्री रेडिक्लस को नष्ट करते है.

 

जॉइंट पेन, सुजन और सरदर्द के इलाज मे

हल्दी दूध को जॉइंट पेन और सुजन को कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इसे नेचुरल एस्पिरिन कहा जाता है और सिरदर्द और दर्दो (pains) खासकर कमर दर्द के इलाज में भी उत्तम है.

 

कैंसर से बचाव

हल्दी में मौजूद कुरकुमीन शरीर में कैंसर के विकास से लड़ता है. कच्ची हल्दी स्किन, ब्रैस्ट, लंग, प्रोस्टेट और कोलन जैसे कैंसरो की वृद्धि को रोकता है. लेबोरेटरी में हुए अध्यनो के मुताबिक हल्दी मे मौजूद कुरकुमीन कैंसर सेल्स से लड़ता है और इन्हें दूसरे स्थानों पर फैलने से रोकता है. रोजाना हल्दी वाला दूध पीने से कैंसर सेल्स की वृद्धि को रोका या खत्म किया भी जा सकता है जब ये प्रारंभिक अवस्था में होते है.

 

रक्त शोधक (blood purifier) और लीवर डीटोक्सीफायर

आयुर्वेद के मुताबिक हल्दी दूध उत्तम रक्त शोधक और डिटोक्सीफायिंग एजेंट (detoxifying agent) है.  हमारे शरीर को टोक्सिंस (toxins) के आक्रमण का सामना करना पड़ता है. जो की हमारे खाने पिने या सांस लेने के माध्यम से हमारे शरीर के खून में प्रवेश हो जाते है. ये टोक्सिंस ना केवल रक्त वाहिकाओ को नुकसान पंहुचा सकते है बल्कि अन्य सभी उत्तको तक इनकी वजह से प्रदूषित रक्त पहुँचता है. इसकी वजह से बीमारिया या असामान्य त्वचा संबंधी रोग हो सकते है.  हल्दी लीवर के कार्य में सुधार करके रक्त की इन अशुद्धियो को बाहर करती है. यह टोक्सिंस को मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर कर देती है.  हल्दी महत्वपूर्ण एंजाइमों के उत्पादन को बड़ा देती है जो की टोक्सिंस को कम करके लीवर में खून को डिटोक्सीफाय कर देता है.   पाचन संबंधी सुधारहल्दी पाचन क्रिया में सुधार करती है. पाचन  संबंधी रोगों से जूझ रहे लोगो का इलाज करने में हल्दी मददगार साबित होती है. यह गैस और ब्लोटिंग के लक्षणों को भी कम करता है.  हल्दी अलसर, दस्त, अपाचन को रोकता है.

 

हड्डियों को मजबूत रखता है

हल्दी वाला दूध हड्डियों को मजबूत करता है और हड्डियों के कमजोर होने से बचाता है. यह कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है.

 

 चमकदार त्वचा के लिये

रोजाना हल्दी वाला दूध पीने से त्वचा चमकदार बनती है, यह रक्त को साफ करता है, इसके एंटी सेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल गुणों की वजह से यह त्वचा संबंधी बीमारियों जैसे एक्जिमा(eczema), कील और मुहांसे को दूर करता है. हल्दी विश्व की श्रेष्ठ एंटी एजिंग (anti-aging) दवा है और हल्दी वाला दूध लेने से वक्त से पहले ही दिखने वाला बुढ़ापा दूर होता है. फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर की कोशिकाओ और त्वचा को नष्ट करते है और हल्दी दूध इन फ्री रेडिकल्स से लड़ते है और इन्हें नष्ट कर देते है.

 

अनिद्रा (insomnia) से छुटकारा

जिन लोगो को रातो को नींद नहीं आती उन्हें सोने से पहले हल्दी वाला दूध लेना चाहिये, यह मस्तिष्क में सेरोटोनिन का लेवल बढ़ा देता है. सेरोटोनिन का संबंध मूड, नींद, डिप्रेशन और आराम से होता है, जब इसका कम लेवल होता है तो हमें नींद ना आना, डिप्रेशन या मूड खराब जैसा अनुभव होता है.

 

इसके अलावा हल्दी दूध के अन्य गुणों में शामिल है, घाव से बहते हुए खून को रोकने का गुण, महिलाओ के प्रजनन स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, पीरियडस का दर्द कम करना आदि शामिल है.

 

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