STORY OF SELFLESS SERVICE: ALEXANDER FLEMING AND HIS FATHER SAVED WINSTON CHURCHILL LIFE

दोस्तो मै आपसे नि:स्वार्थ सेवा (selfless service) की एक एक कहानी शेयर करने जा रहा हू. जिसे पढ़कर आप जानेंगे की कैसे बिना लालच के किए गए कार्य जीवन मे चमत्कार लेकर आते है.

एक दिन एक गरीब स्कॉटलैंड निवासी (Scottish) किसान ने निकट के दलदल से किसी कि आवाज सुनी जो सहायता के लिए चिल्ला रहा था। उसने अपने औज़ार रखे और वह दलदल कि तरफ भागा। वहां एक लड़का दलदल मे डूब गया था, उसकी कमर दलदल मे घुस चुकी थी. वह मदद के लिए चिल्ला रहा था तब किसान Fleming ने उसे दलदल मे डूबने से बचा लिया। अगले दिन एक सुंदर कार Scotsman के साधारण घर के आगे रुकी. सुंदर कपड़े पहने एक रईस उस गाड़ी से बाहर निकले और किसान Fleming को अपने से परिचित कराया कि वह उस बच्चे के पिता है जिसे आपने कल दलदल मे डूबने से बचाया था. रईस व्यक्ति किसान Fleming से कहते है कि आपने मेरे बच्चे कि जान बचाई है इसलिए मै आपको धन्यवाद कहता हु और आपको कुछ देना चाहता हु। किसान फ्लेमिंग अपने इस कार्य के लिए कुछ भी लेने से मना कर देता है और उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा देते है। उसी समय किसान फ्लेमिंग का बच्चा भी वहा आ जाता है। रईस व्यक्ति किसान से पूछते है कि क्या ये तुमहारा बच्चा है. किसान हां कहता है. रईस व्यक्ति किसान के साथ एक deal करता है कि मै इस बच्चे को वही शिक्षा प्रदान करवाऊँगा जो मेरे बच्चे को मिलती है. अगर इस बच्चे मे अपने पिता कि तरह कुछ भी होगा तो इसमे कोई शक नहीं कि यह ऐसा व्यक्ति बनेगा जिस पर हम दोनों को गर्व होगा. किसान ने ये बात स्वीकार कर ली और उस रईस पुरुष ने ऐसा ही किया. किसान के पुत्र ने अच्छे स्कूलो से शिक्षा ग्रहण कि और लंदन के ST. MARY’S HOSPITAL MEDICAL SCHOOL से ग्रेजुएट हुए. आगे चलकर उन्होने PENICILLIN का आविष्कार किया, और पूरी दुनिया मे SIR ALEXANDER FLEMING के नाम से प्रसिद्ध हुए. कुछ साल बाद उसी रईस व्यक्ति का बेटा (जिसकी किसान Fleming ने दलदल मे डूबने से जान बचाई थी) को pneumonia(निमोनिया) हो गया. इस बार उसकी जान Alexander Fleming द्वारा खोजे गए penicillin ने बचाई।

FLEMING

दोस्तो, उस रईस व्यक्ति का नाम था LORD RANDOLPH CHURCHILL और उनके बेटे का नाम था प्रसिद्ध WINSTON CHURCHILL(विन्सटन चर्चिल) जो बाद मे जाकर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बने। 

इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि कर्म का आशय वह कार्य है, जिसके करने के उद्देश्य में प्रतिफल की लालसा हो और कर्मयोग का मतलब समभाव रखते हुए कर्म का निर्वाह करना है। यहां फल की लालसा नहीं है से किए गए कार्य का फल जरूर मिलता है.  किसान फ्लेमिंग ने बिना स्वार्थ के बच्चे की जान बच्चाई और अपने इस कार्य के लिए उसने कुछ भी लेने से मना कर दिया. हम जब किसी की सहायता करते है तो उस व्यक्ति की इच्छा पूरी करने मे मदद करते है. बदले मे हमारी इच्छाओ के पूरा होने के रास्ते भी बन जाते है. किसान फ्लेमिंग के द्वारा किए कार्य ने उसके बच्चे की अच्छी शिक्षा के रास्ते खोल दिये जिससे वह penicillin का आविष्कार कर विश्व प्रसिद्ध हुआ.

भगवान श्री कृष्ण ने  भी गीता में कहा है कि निष्काम कर्म का वह कार्य है, जिसके करने के उद्देश्य में फल की लालसा नहीं होती  लेकिन यहाँ फल हमेशा मिलता है। हर काम का हमे फल मिलता ही है। इसलिए किसी भी काम को करते वक्त ये मत सोचिए की इससे मुझे क्या फायदा है।

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