अपने चेहरे, दिखावट या आकार से संतुष्ट न होने की बीमारी है बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर

बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर/Body Dysmorphic Disorder (BDD) एक अलग मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति को अपने चेहरे या आकार मे कुछ दोष उत्पन्न हो जाने की आशंका या डर पैदा हो जाता है। ये खामिया अक्सर दूसरों के लिए अनजान होती हैं। उदाहरण के तौर पर व्यक्ति को लगने लगे की उसकी नाक या कान का आकार दिनो दिन बढ़ता जा रहा है या उसके होठ भद्दे दिखने लगे है। ऐसे मे वे ज़्यादातर समय अपनी दिखावट के बारे सोचते रहते है और दिन मे घंटो  शीशे के सामने अपने आकार की जांच करते हैं नतीजतन,  इस विकार वाले लोग खुद को “बदसूरत” के रूप में देखते हैं और अक्सर लोगो से घुलने मिलने से बचते हैं।

 

बीडीडी से परेशान लोगों मे चिंता के सबसे आम क्षेत्रों में शामिल हैं:

Skin imperfections: इनमें झुर्रीयां, निशान, मुँहासे और धब्बे शामिल हैं।

Hair: इसमें सिर या शरीर के बाल बालों की अनुपस्थिति शामिल है।

Facial features: इसमें नाक, कान, होठ या चेहरे का आकार शामिल हैं।

 

बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर के रोगियों मे eating disorders  और obsessive-compulsive disorder के लक्षण भी देखने को मिलते है।

बीडीडी एक दीर्घकालिक विकार है जो पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करता है। यह आमतौर पर किशोर अवस्था या प्रारंभिक वयस्कता के दौरान शुरू होता है। इस बीमारी के लोग ज़्यादातर यूरोपियन और एशियन देशो मे देखने को मिले है।

 

Symptoms of Body Dysmorphic Disorder in hindi – बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर के लक्षण

 

  • अपने शरीर के एक विशिष्ट क्षेत्र (विशेष रूप से अपने चेहरे) के बारे में बहुत चिंता करना

 

  • हमेशा दूसरों से अपनी दिखावट के बारे में पूछना

 

  • अन्य लोगों के साथ अपनी रूप और दिखावट की तुलना में काफी समय बिताना

 

  • अपने आप को शीशे में दिन मे बहुत बार देखना

 

  • स्टाइल, मेकअप या कपड़ो के द्वारा  कथित  खामियों को छिपाने का प्रयास

 

  • कथित खामियों (imagined defects) को बार-बार मापना या छूना

 

  • सामाजिक परिस्थितियों या दूसरों के साथ घुलने मिलने से बचना

 

  • अपनी दिखावट के बारे मे सोचने से इतने व्यस्त होने के कारण सामाजिक जीवन, काम, स्कूल या कामकाज के अन्य क्षेत्रों में परेशानी या समस्याएं पैदा होना

 

Causes of Body Dysmorphic Disorder in hindi – बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर के कारण

 

यह पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं है कि व्यक्ति को  डिस्मोर्फिक विकार क्यो होता  है। हालाँकि कई अन्य मानसिक बीमारियों की तरह, बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर भी कई  कारणों का  परिणाम है, जैसे कि:

Brain differences – मस्तिष्क संरचना या न्यूरोकैमिस्ट्री में असामान्यताएं Body Dysmorphic Disorder मे  भूमिका निभा सकती हैं।

 

Genes – कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि बॉडी डिस्मोर्फिक विकार उन लोगों में अधिक होता है जिनके पैरेंट्स को भी यह विकार या ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर अतीत मे हुआ हो।

 

Environment – आपका पर्यावरण, जीवन के अनुभव और संस्कृति body dysmorphic disorder  में योगदान दे सकती हैं, खासकर यदि उनमें आपके शरीर या छवि, या यहां तक ​​कि बचपन मे उपेक्षा या दुर्व्यवहार या नकारात्मक सामाजिक मूल्यांकन शामिल हैं।

 

Others – इसके अलावा कम आत्म विश्वास, डिप्रेशन, anxiety, OCD, Eating disorder, कुछ विशेष पर्सनालिटी जैसे कि perfectionism, सामाजिक दबाव या सुंदरता की उम्मीद आदि भी इस विकार मे भूमिका निभाते है।

 

Treatment of Body Dysmorphic Disorder in hindi – बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर का उपचार

 

मनोचिकित्सा: यह एक प्रकार का व्यक्तिगत परामर्श है जो Body Dysmorphic Disorder वाले व्यक्ति की सोच (संज्ञानात्मक थेरेपी) और व्यवहार (व्यवहार चिकित्सा) को बदलने पर केंद्रित है। इस चिकित्सा का लक्ष्य कमी या खामियों के बारे में बनी झूठी धारणा को सही करना और बाध्यकारी व्यवहार को कम करना है।

 

दवाइयाँ : सेरोटोनिन रीपटेक इनहिबिटर (SSRIs) नामक कुछ एंटीड्रिप्रेसेंट दवाएं body dysmorphic disorder के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं ।

 

समूह और पारिवारिक चिकित्सा: उपचार की सफलता के लिए पारिवारिक सहायता बहुत महत्वपूर्ण है। यह महत्वपूर्ण है कि परिवार के सदस्य इस विकार को समझें और इसके लक्षणों को पहचाने।

 

दोस्तो सेल्फी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण आज युवाओ मे अपनी दिखावट को लेकर काफी उत्सुकता है। ऐसे मे वे अपने आपको हर तरह से perfect करना चाहते है। यह सोच खासकर लड़कियों मे ज्यादा देखने को मिल रही है, सेल्फी और दिखावट की इस लत के कारण बॉडी डिस्मोर्फिक डिसऑर्डर के रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। इसलिए आप लोगो के लिए इस रोग के बारे मे जानना काफी जरूरी हो जाता है ताकि लक्षणो के आधार पर सही समय पर चिकित्सा या परामर्श लेकर मानसिक बोझ से बचा जा सके।

 

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