जानिये गुड फैट और बैड फैट के बारे मे Good Fats vs. Bad Fats

दोस्तो क्या आप जानते है फैटस कई प्रकार के होते है, इनमे से कुछ फैट हमारे शरीर लिये के लिये लाभदायक होते है और कुछ हानिकारक.  फैटस सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड प्रकार के होते है. अनसैचुरेटेड फैटस शरीर के लिये लाभदायक होते है इन्हे गुड फैटस कहा जाता है जबकि सैचुरेटेड फैटस स्वास्थ्य के लिये अच्छे नही होते, इन्हे बैड फैटस कहा जाता है.  अनसैचुरेटेड फैटस के दो रूप होते है एक मोनोअनसैचुरेटेड फैटस और पोली अनसैचुरेटेड फैटस. पोली अनसैचुरेटेड फैटस भी दो प्रकार के होते है.  ये दो प्रकार है ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स. इस पोस्ट मे हम जानेंगे की ये विभिन्न प्रकार के फैटस क्या करते है, इसके क्या फायदे और नुकसान है और इन्हें कैसे प्राप्त किया जाता है.

 

विभिन्न प्रकार के फैट Different types of fats

बैड फैटस good fats

सैचुरेटेड फैटस  saturated fats

 

ऐसा माना जाता है की सैचुरेटेड फैटस स्वास्थ्य के लिये अच्छे नहीं होते, क्योकि ये बैड कोलेस्ट्रोल के स्तर को बढ़ाते है, जिससे आपको हृदय संबंधी बीमारिया होने का खतरा बढ़ जाता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार आप प्रतिदिन 5 से 6 % कैलोरी(120 कैलोरी प्रति 2000 कैलोरी पर) सैचुरेटेड फैट से ले सकते है. सैचुरेटेड फैट के स्त्रोत है.

रेड मीट, पोल्ट्री, चिकन, दूध, मक्खन, अंडे, पाम आयल, कोकोनट आयल, चीज, आइस क्रीम.

 

ट्रांस फैट  (trans fat)

 

ट्रांस फैट भी एक तरह का फैट होता है जो आपके लिये अच्छा नहीं होता. ये फैट खाने का स्वाद बढ़ा देता है, यह भोजन को लंबे समय तक खाने योग्य बनाये रखता है. इसके संभावित खतरे है हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, स्ट्रोक जैसी बीमारिया. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार आप प्रतिदिन 1 % कैलोरी ट्रांस फैट से ले सकते है.

इसके स्त्रोत है ट्रांस फैट पशु आधारित खाध पदार्थो मे थोड़ी मात्रा मे पाया जाता है. जैसे मीट और मिल्क. हालाँकि ज्यादातर ट्रांस फैट एक औद्योगिक प्रक्रिया मे बनाये जाते है.  ट्रांस फैट के स्त्रोत

तले हुए खाध पदार्थ, केक, बिस्कुट और कूकीज, मक्खन, क्रैकर्स, बेक किया हुआ भोजन, जमा हुआ पिज्जा, डोनटस.

गुड फैटस good fats

अनसैचुरेटेड फैट unsaturated fat

 

अनसैचुरेटेड फैटस आपके दिल और शरीर के बाकी हिस्सों के लिए अच्छे होते हैं, विशेषज्ञ यह सलाह देते है कि आप उन्हें सैचुरेटेड और ट्रांस फैट के स्थान पर खा सकते हैं। यह कमरे के तापमान पर तरल होते है और ज्यादातर सब्जियों, तरल और मछली से प्राप्त किये जाते है. इसके दो रूप है मोनोअनसैचुरेटेड फैटस और पोली अनसैचुरेटेड फैटस.

 

मोनोअनसैचुरेटेड फैटस

 

जिन आयल मे यह फैट होता है वह कमरे के तापमान पर तरल होते है लेकिन उन्हे जमाया जाए तो वे ठोस हो जाते है. इसके प्रमुख स्त्रोत है

आयल (ओलिव आयल, केनोला आयल, पीनट्स आयल), एवोकाडोस, बादाम, अखरोट और दुसरे नट्स.

 

पोली अनसैचुरेटेड फैटस polyunsaturated fats

 

पोली अनसैचुरेटेड आयल कमरे के तापमान पर भी तरल रहता है और इसे जमाया जाये तब भी यह तरल ही रहता है. इसके प्रमुख स्त्रोत है.

अलसी के बीज, मक्का, सोयाबीन, और सूरजमुखी तेल, अखरोट, मछली.

पोली अनसैचुरेटेड फैटस भी दो प्रकार के होते है.  ओमेगा 3 फैटी एसिड्स और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स.

 

ओमेगा 3 फैटी एसिड्स omega 3 fatty acids

 

इस आवश्यक फैट को भोजन से ही प्राप्त करना पढता है, इसे बॉडी खुद नहीं बनाती, कुछ अध्यनो मे पता चला है की यह कार्डियोवास्कुलर बिमारी के खतरे को कम करता है.

 

ओमेगा 3 फैटी एसिड्स के भी तीन रूप होते है 

 

Eicosapentaenoic acid (EPA) – मछली मे पाया जाता है

Docosahexaenoic acid (DHA) – यह भी मछली मे पाया जाता है

Alpha-linolenic acid (ALA) – वनस्पति स्रोतों जैसे अलसी के बीज , वनस्पति तेल और नट्स

 

ओमेगा 6 फैटी एसिड्स omega 6 fatty acids

 

ओमेगा – 6 फैटी एसिड ज्यादातर पत्तेदार हरी सब्जिया, बीज, नट्स, और वनस्पति तेलों में पाया जाता हैं। कुछ अध्यनो में पता चला है की यह हृदय के लिये अच्छा होता है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार आप प्रतिदिन 5 से 10 % इससे ले सकते है.

 

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