जानिए कैसे पूरी होगी आपकी इच्छा – kaise puri ho desire

हम में से ज्यादातर लोग अपने अपने धर्म के देवी देवता, भगवान् को पूजते है, उनसे प्रार्थना करते है , इच्छा (desire) करते है, उनसे कुछ न कुछ मांगते है (wishes), अपने मन की बात (mann ki baat) कहते है लेकिन आज की generation की यह अक्सर शिकायत रहती है की जो वह भगवान् से मांगते है उन्हें नहीं मिलता है. इसलिए इस दुनिया में भगवान (god, creator) नहीं है. खैर भगवान् है या नहीं ये तो अपने अपने विश्वास की बात है.

कैसे पूरी होगी desire

धार्मिक संस्थान कोई भी हो यहाँ मांगने वाले हर किस्म के आते है चाहे वो गरीब से गरीब हो या बहुत अमीर. इसे आप प्रार्थना या मन की बात (mann ki baat)  भी कह सकते है और मन्नत भी. दिलचस्प बात यह है की इनमे से बहुत कम लोगो को वह मिलता है जो वे मांगते है. बार बार मांगने या मन्नते मांगने के बावजूद भी निराशा हाथ लगती है तो विश्वास टूट जाता है.

लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्यों सिर्फ कुछ लोगो को वह सब कुछ मिलता है जो वह चाहते है?

क्योकि चाहे वो भगवान् हो या आपका भाग्य (luck) वह हमें वो चीज नहीं देता जो हम desire करते है, वह हमें वो चीज देता है जिसकी हमें जरुरत है. जिस इंसान में तड़प है, लगन है और प्रयास की निरंतरता है उसे वह भी मिल जाता है जो वह चाहता है.

इसके बात को समझाने के लिए हम आपको एक उद्धरण देते है. भागवत गीता जो की हिन्दुओ का सबसे पवित्र ग्रथ है. यह सिर्फ एक धार्मिक पुस्तक ना होकर एक गाइड है है जो इंसान को जीने की सही दिशा दिखाती है. सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि विदेशी मनोविज्ञानिक भी इस पर शोध कर रहे है. गीता के श्लोको में भी कर्मयोग को सबसे बड़ा योग बताया गया है. जब अर्जुन युद्ध के समय अपने करीबियों को देखकर हार मान लेता है और युद्ध करने से मना कर देता है तो भगवान कृष्ण उसे पूजा – पाठ या प्रार्थना करने के लिए नहीं कहते बल्कि उसे समझाते है. उसे ज्ञान देते है ताकि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ सके. उसके सामने भगवान् थे फिर उसे अपनी लड़ाई खुद लड़नी पढ़ी. किसी भी धार्मिक ग्रंथ का मतलब उसे पढ़कर पाप कम करना नहीं है बल्कि उसे समझकर सिख लेना है और अपनी जिन्दगी में लागु करना है. कोई भगवान् आपको स्पेशल उपदेश देने नहीं आएगा.

प्रकृति ने हमें जन्म से ही अमीर बनाया है. शरीर में असीम शक्ति का अंदाजा हमें अक्सर नहीं होता. हजारो मीटर की दूरियां हमारा शरीर दौड़ता है. शओलिन मठ में कुंगफू सिखने वाले इसी शरीर से बड़े बड़े पत्थर तोड़ते है.

प्राथना करना भी जरूरी है

प्रार्थना या अध्यात्मिक साधना का मतलब कोई चीज या मन्नत मांगने से नहीं है. आध्यामिकता या प्रार्थना हमें नकारात्मकता, निराशा से निकालने का काम करती है. आध्यामिकता हमारे अन्दर की शक्तियों और काबिलियत (talent) को सामने लाने का काम करती है.

छोटी छोटी चीजे मांगते रहने से आप थक जायेंगे. आत्मा कमजोर पढ़ जाएगी और जिन्दगी बेकार लगने लगेगी.. अगर आप कर्म करेंगे, अपने काम के प्रति समर्पित रहेंगे तो दुनियां की हर ताकत आपके साथ रहेगी.

लेकिन इसका यह मतलब नहीं है की प्रार्थना से कुछ फायदा नहीं होता. जब चारो और अंधकार और निराशा हो तो एक प्रार्थना या भगवान पर भरोसा ही आखरी आशा की किरण होती है लेकिन इस आशा को बनाये रखने के लिए dedication, आत्मविश्वास का होना बहुत जरुरी है.

 

आपकी भी desire होंगी पूरी

HOPE + HARDWORK + SELF CONFIDENCE = SUCCESS

 

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