जानिए क्या है आपका locus of control और कैसे करता है यह आपको प्रभावित

मनोविज्ञान में एक काफी useful concept है जिसे locus of control कहा जाता है.  इसके बारे में ज्यादातर आम लोग नहीं जानते लेकिन ये काफी हद उनकी जिंदगी से जुड़ा हुआ है. ये इंसान का locus of control ही है जो उसके self confidence को बढ़ाता या घटाता है. कई लोगो को लगता है की उनकी जिंदगी में होने वाली ज्यादातर घटनाएँ जैसे अच्छे नंबर आना, फेल हो जाना या  अच्छी नौकरी मिलना उनकी  अच्छी किस्मत का फल है तो कई लोगो को लगता है कि इसके लिए वो खुद जिम्मेदार है. अलग अलग लोगो के अलग अलग विश्वास है और मनोविज्ञान की भाषा में यही  locus of control है.

 

क्या है लोकस ऑफ़ कंट्रोल – locus of control in hindi

 

लोकस ऑफ़ कंट्रोल इंसान का विश्वास है की कितने हद तक उसकी जिंदगी में होने वाली घटनाओ पर उसका नियंत्रण है. ये दो तरह के होते है – internal और external.

internal लोकस ऑफ़ कंट्रोल वाले लोगो को लगता है उनकी क्षमता और  व्यवहार ही उनके जीवन में मिलने वाली सफलताओ और विफलताओ को तय करती है.  ऐसे लोग भाग्य से ज्यादा कर्म को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते है. उदहारण के तौर पर ऐसे लोग जिंदगी में मिलने वाली मुसीबतों, दुखो, खुशियों को अपने किस्मत से न जोड़कर खुद इसकी जिम्मेदारी लेते है.

 

रिसर्च में पाया गया है की जिन लोगो में internal locus of control ज्यादा होता है वह

 

चिंता और डिप्रेशन का कम शिकार होते है.

स्कूल, कॉलेज और अपने करियर में ज्यादा अच्छा करते है

तनाव से निपटने में ज्यादा सक्षम होते है

खुद को और दुसरो को प्रोत्साहित करने की ज्यादा क्षमता रखते है.

असफलताओ का सामना बेहतर से करते है.

लक्ष्यों के प्रति फोकस रहते है.

self confidence ज्यादा मजबूत होता है.

 

दूसरी ओर external लोकस ऑफ़ कंट्रोल वाले लोगो को लगता है की उनके जीवन में होने वाली ज्यादातर चीजे उनके हाथ में नहीं है बल्कि यह उनकी किस्मत या भगवान् की इच्छा से हो रहा है. इसलिए  ऐसे लोग  ज्यादा जवाबदेह नहीं होते है. उदहारण के तौर पर पेपर में कम नंबर आने पर आ जाने पर इंटरनल लोकस ऑफ़ कंट्रोल वाले बच्चे सोचते है की उनसे कही चुक हो गई इसलिए नतीजे ज्यादा बेहतर नहीं आये जबकि जिन बच्चो में एक्सटर्नल लोकस ऑफ़ कंट्रोल की भावना होती है वे इसका कारण किसी बाहरी चीज पर डाल देंगे जैसे पेपर मुश्किल था या फिर उन्हें लिखने के लिए टाइम कम मिला आदि.

सीधे शब्दों में कहे तो इनका नजरिया भाग्यवादी होती है. इसलिए कई बार ये अपने आपको परेशानियों या मुसीबतों से निकालने में मुश्किल पाते है. हालाकिं इसका यह मतलब नहीं की ऐसे लोग सफल नहीं हो पाते या  अपने सपनो को पूरा नहीं कर पाते.

 

शायद यही वजह है की गीता में भाग्यवादी नजरिए से ज्यादा कर्म फल को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है.

 

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