जानिए क्यों टूट जाते है न्यू इयर रिजॉल्यूशन Why New Year Resolutions fail in hindi

काफी आसान होता है नए साल में खुद से कुछ वादा करना या कोई नया संकल्प लेना जिसे आज की भाषा में “न्यू इयर रिजॉल्यूशन” कहते है.  यह ऐसे ही की जैसे हम खुद से एक बात कहे और पूरा साल उसे अपनी जिन्दगी में लागु करने की सोचे जैसे कई लोग  New Year Resolutions लेते है की वह नए साल में सिगरेट नही पियेंगे, कई लोग जिम जाने का रिजॉल्यूशन लेते है तो कोई पतले होने का. लेकिन इनमे से ज्यादातर लोग अपना वादा पूरा नही कर पाते.  शोधकर्ता जॉन नॉरक्रॉस और उनके सहयोगियों के अनुसार, जिन्होंने Journal of Clinical Psychology में अपने निष्कर्षों को प्रकाशित किया, लगभग 50%  लोग नए साल के दिन  कोई न कोई रिजॉल्यूशन लेते है और उन्हें पूरा करने वालो की संख्या न के बराबर होती है.

क्या आप जानते है ऐसा क्यों होता है? क्यों हम अपने आप से किया हुआ एक वादा भी पूरा नहीं कर पाते? तो आइये जानते है क्यों टूट जाते है New Year Resolutions.

 

क्यों पुरे नहीं हो पाते नए साल पर लिए गये संकल्प – why New Year Resolutions fail in hindi

 

नए साल से कोई नयी शुरुआत करना या किसी बुरी आदत को छोड़ने का मन बनाना, ऐसा हम सभी ने कभी न कभी जरुर किया होगा लेकिन क्या हमने अपने आप से किया हुआ  प्रॉमिस पूरा किया ? शायद नही. इस बात पर कनाडा की कार्लटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिमोथी पायकल का कहना है कि इन्सान की प्रवृति चीजों को टालने की होती है. वह हर चीज़ को आगे पर टाल देता है. असल में व्यक्ति  नई शुरुआत से डरता है, खुद को बदलने से बचना चाहता है और उसे लगता है की नया समय आयेगा तो नई शुरुआत भी हो जाएगी.

पायकल  के एक और साथी है प्रोफेसर पीटर हरमन जिन्होंने इस तरह के रिजॉल्यूशन को  “फाल्स होप सिंड्रोम/ false hope syndrome” कहा है. उनका मानना है की इस तरह के संकल्प वास्तविक नही होते और न ही व्यक्ति के विचारो से मेल खाते है. साथ ही उनका कहना है की जब व्यक्ति शुरुआत में इस तरह के संकल्प को पूरा कर रहा होता है तो वह झूठ की स्थिति में जीता है जिससे आगे चल कर वह संकल्प टूट जाता है.

 

इस पर कुछ अन्य शोध भी हुए है जो बताते है की New Year Resolutions का टूटना तय है क्योकि इसमें व्यक्ति को अपने व्यवहार बदलने की जरूरत होती है जो एक दिन या एक पल में नही बदल सकता. हमारी सोच को बदलने में समय लगता है. मनोविज्ञानिको का मानना है की हमारी सोच का बदलना हमारी दिमाग की अवस्था का बदलना होता है. दिमाग के ऍम.आर.आई. से पता चलता है की सोचने का तरीका हमारे दिमाग में एक न्यूरल पाथवेज बना देता है. यह मार्ग किसी भी आदत के लिए जरूरी है और जब हम कोई नया संकल्प लेते है तो इस मार्ग को दुबारा बनाने की आवश्यकता होती है जिसमे काफी समय लगता है.

 

इसलिए 31 दिसम्बर को अचानक से लिए गए फैसले के लिए हमारा दिमाग तैयार नही होता जो 1 दिसम्बर से उस पर अमल कर सके. हालांकि सकारत्मक सोच और दृढ निश्चय से ये संकल्प कुछ दिनों तक चलते है और फिर थोड़े दिनों बाद टूट जाते है. इसलिए अगर आपको नए साल पर कोई संकल्प लेना है तो उसके लिए पहले से अच्छी तैयारी करनी पड़ेगी. और उन Resolutions को पूरा करने के लिए एक ठोस plan बनाना होगा.

 

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2 Comments

  1. neelesh 22/01/2018
    • whats knowledge 22/01/2018

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