जानिए क्या और क्यों होता है सोशल फोबिया social phobia in hindi

राम 20 साल का एक लड़का है जो कॉलेज में पढता है. जब भी उसे क्लास में प्रेजेंटेशन देने के लिए कहा जाता है वह काफी घबरा जाता है. उसे पसीना आने लगता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है. उसे ऐसा लगता है की हर कोई उस पर हँस रहा है. इसलिए वह क्लास में सबसे आखिरी के बैंच पर बैठता है ताकि किसी की भी उस पर नजर न पड़े. सिर्फ क्लास में ही नहीं दूसरी जगहों पर भी लोगो की उपस्थिति उसे बैचेन कर देती है. इसलिए वह शादी, पार्टी और बाजारों में भी जाने से संकोच करता है. जब राम के घर वालो ने मनोविज्ञानिक से परामर्श किया तब उन्हें पता चला की राम को सोशल फोबिया  है.

 

क्या होता है सोशल फोबिया – social phobia in hindi

 

सोशल फोबिया वह स्थिति है जब व्यक्ति को दुसरे लोगो की उपस्थिति या भीड़ में घबराहट होने लगती है. उस व्यक्ति में यह डर बना रहता है की लोग उसका मुल्यांकन करेंगे जिसके कारण वह घबराया और चिंतित नजर आता है.. इसलिए वह ऐसी परिस्थितियों या जगहों से दूर रहना चाहता है. इस दशा को social anxiety disorder (सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर) के नाम से भी जाना जाता है.

सोशल फोबिया से पीड़ित लोग आम लोगो के बीच बोलने से भी काफी घबराते है. ऐसे लोग आम लोगो के बीच जैसे होटल या बाजार में खाना खाने या सार्वजानिक जगहों पर टॉयलेट करने भी कतराते है.

आमतोर पर सोशल फोबिया की शुरुआत किशोरावस्था में होती है. क्योकि यह वह उम्र होती है जब इंसान अपने और समाज के बारे में जानना शुरू करता है.

 

 

क्यों होता है सोशल फोबिया – cause of social phobia in hindi

 

मनोविज्ञानिको के अनुसार सोशल फोबिया के कई कारण है.  यह समस्या मनोविज्ञानिक और बायोलॉजिकल दोनों कारणों से होती है.

 

बायोलॉजिकल कारण – biological cause of social phobia

 

  • सोशल फोबिया पर किये गये कई शोधो के अनुसार यह समस्या genetic है. यानि अगर किसी के माता पिता को यह समस्या थी तो उनके बच्चो को भी यह दिक्कत हो सकती है.

 

  • अन्य शोधो में पाया गया है की social phobia उन लोगो को होता है जिनका autonomic nervous system कई तरह की स्थितियों में जल्दी एक्टिव हो जाता है.

 

  • इंसान के दिमाग का एक भाग होता है जो डर और भावनाओ से जुड़ा  होता है. इसे amygdala कहते है. जिन लोगो का यह भाग ज्यादा सेंसिटिव होता है उनमे सोशल फोबिया के लक्षण विकसित होने की संभावना रहती है.

 

 

मनोविज्ञानिक कारण – psychological cause of social phobia

 

  • मनोविज्ञानिको के अनुसार सोशल फोबिया उन लोगो में ज्यादा देखा जाता है जो हर परिस्थिति में घटनाओ को नकरात्मक या गलत ढंग से अपनाते है. ऐसे लोग सामाजिक परिस्थिति या दुसरे लोगो द्वारा किया जा रहे आंकलन या मूल्यांकन को लेकर काफी चिंतित रहते है. उन्हें हमेशा लगता है की लोग उन्ही के बारे में सोच रहे है या बाते कर रहे है. कुछ भी करने से पहले उसके मन में यह ख्याल आता है की लोग क्या सोचेंगे. इसलिए दुसरे लोगो की उपस्थिति उस इंसान में घबराहट पैदा कर देती है.

 

  • कई लोगो के साथ अतीत में कुछ ऐसी नकरात्मक घटनाये घट जाती है जिसके कारण वह दुसरे लोगो का सामना करने से डरते है.

 

 

कैसे किया जाता है सोशल फोबिया का इलाज – treatment of social phobia n hindi

 

आमतोर पर मनोविज्ञानिक सोशल फोबिया के उपचार के लिए दवाइयों और साइकोलॉजिकल थेरेपी का सहारा लेते है.

रोगियों की चिंता या डर को कम करने के लिए एंटी एंग्जायटी ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है. इन  दवाइयों की सहायता से रोगी विचलित या परेशान नहीं रहता.

 

साथ ही समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मनोविज्ञानिक पद्धति अपनायी जाती है. इसे cognitive behavior therapy (CBT) के नाम से जाना जाता है. इसके जरिये रोगी के नकरात्मक विचारो को समझा और दूर किया जाता है. रोगी को सिखाया जाता है की जब भी वह  उस परिस्थिति जिससे वह घबराता है (जैसे बाजार), का सामना करे अपने अन्दर चल रही बातो को समझे और उनका सामना करें.

साथ ही मन शांत रखने के लिए रोगी को एक्सरसाइज और मैडिटेशन की भी सलाह दी जाती है .

 

और सबसे जरुरी बात अगर आपके दोस्तों या परिवार में किसी को यह समस्या है तो उसे इग्नोर करने की बजाय उस इंसान से बाते करें और उसकी परेशानी जानने की कोशिश करें. उसे विश्वास दिलाएं की आप उसके साथ है. उसका डर और नकरात्मक विचारो को शांति से सुने और दूर करने की कोशिश करें. इससे उसमे आत्म विश्वास पैदा होगा. अगर समस्या ज्यादा है तो किसी मनोचिक्त्सक से परामर्श जरुर करें

 

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  1. sabiha khan 12/02/2018

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