कैसे बनी एक स्कूल ड्रॉपआउट दुनियां की सबसे अमीर महिला success story in hindi

आज हम आपके साथ एक ऐसी महिला की कहानी शेयर करने जा रहे है जिसने अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं की और आज वह अरबपति है. यह सब उसने अपने दम पर हासिल किया. यह कहानी है चीन में रहने वाली जो कनफे की जिनका जीवन कई संघर्षो से होकर गुजरा लेकिन अंत में उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की.

 

Zhou Qunfe success story in hindi – कैसे बनी जो कनफे दुनियां की सबसे अमीर महिला

 

जो कनफे,  चीन की एक 45 वर्षीय business women है, जो दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में से एक है. एक बात जो उन्हें खास बनाती है और वे यह है उन्होंने यह सब अपने दम पर हासिल किया. जो कनफे टचस्क्रीन निर्माता कंपनी लेंस टेक्नोलॉजी/ lens technology की संस्थापक और सीईओ हैं. यह कंपनी सैमसंग, एप्पल, Huawei  जैसी कंपनियों को टचस्क्रीन सेंसरों के साथ अन्य तकनीकी चीजो की आपूर्ति करती है। आने वाली एप्पल की घड़ियों में लेंस टेक्नोलॉजी की sapphire  क्रिस्टल स्क्रीन और हाई क्वालिटी ग्लास का इस्तेमाल होगा। 2003 में अपना खुद का बिज़नस शुरू करने से पहले, जो कनफे ने एक ग्लास कंपनी में फैक्ट्री वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया था.

 

Early life of Zhou Qunfe in hindi

 

जो कनफे/ Zhou Qunfe का जन्म 1970 में Xiangxiang  में हुआ था, जो चीन के हुनान नामक क्षेत्र में स्थित है। जो कनफे एक गरीब परिवार में पैदा हुई थी । उनके पिता एक कुशल कारीगर थे.  1960 में उनके पिता ने अपनी एक उंगली खो दी और औद्योगिक दुर्घटना में अंधे हो गये । जब वह 5 साल की थी तब उनकी मां का निधन हो गया. । उनका एक भाई और एक बहन है। अपने परिवार की खराब स्थिति के कारण, कनफे/ Zhou Qunfe ने 15 वर्ष की उम्र में अपना स्कूल छोड़ दिया।  स्कूल छोड़ने के बाद, जो कनफे/ Zhou Qunfe चीन के गुआंग्डोंग प्रांत में अपने चाचा और उनके परिवार के साथ रहने लगी जहाँ उन्होंने कुछ काम ढूंढना शुरू कर दिया।

 

चीन के शेन्ज़ेन शहर के शेन्ज़ेन विश्वविद्यालय में पार्ट टाइम कोर्स करते समय Zhou Qunfe ने कई कंपनियों के लिए काम किया। अपने कोर्स को पूरा करने के बाद,  कनफे एक छोटी सी फर्म में काम करने लगी । वहां वह घड़ियों के विभिन्न भागों का उत्पादन करती । वह प्रति दिन लगभग एक डॉलर  कमाती थी।

तीन महीनों की कड़ी मेहनत के बाद, उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। कनफे ने अपने मालिक को इस्तीफे का एक पत्र लिखा। उनके पत्र ने कारखाने के निर्देशक को प्रभावित किया और उसने उन्हें प्रमोशन की पेशकश की.

कनफे के चचेरे भाई ने उसे अपना बिज़नस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया. 1993 में  उसने अपनी बचत से अपनी खुद की एक कंपनी खोली। जो के भाई और दो चचेरे भाइयों ने उनकी बिज़नस में बहुत मदद की। वर्ष 2001 में, जो ने सफलता हासिल की, जब उसकी फर्म ने टीसीएल कॉर्पोरेशन के लिए मोबाइल फोन स्क्रीन बनाने का एक आकर्षक कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया,.

वर्ष 2003 में, कनफे ने टचस्क्रीन निर्माता कंपनी लेंस टेक्नोलॉजी को launch किया। आज यह कंपनी नई उचाईयों को छु रही है. आज लेंस टेक्नोलॉजी के 32 कारखाने है जिसमे करीब 90 हज़ार लोग काम करते है. आज कनफे 8.4 अरब डॉलर की मालकिन है जो उन्हें दुनियां में सबसे अमीर सेल्फ-मेड  women बनाती है .

 

जो कनफे के जीवन की कहानी हम सबको सिख देती है की अगर मन में विश्वास हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है.  कनफे ने अपने बलबूते पर वह सब हासिल किया जिसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा जा सकता.  किसी ने सही ही कहा है की मेहनत और विश्वास वह शक्ति है जिससे उजड़ी हुई दुनियां में भी रौशनी लाई जा सकती है.

 

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