व्यक्तित्व विकास – personality development tips in hindi

हर इंसान की अपनी अपनी personality होती है। वही हर इंसान की पहचान है। प्रकृति का यह नियम(rule) है कि हर एक इंसान की आकृति दूसरे से भिन्न है। आकृति का यह जन्मजात अंतर सिर्फ आकृति तक ही सीमित नहीं है; हमारा स्वभाव(nature), व्यवहार(behavior)  और संस्कार में भी वही असमानता रहती है। सफलता यानि की success  एक ऐसा शब्द है, जो हर कोई चाहता है, लेकिन उसे कैसे पाया जाए, यह हम मे से बहुत कम लोग जानते हैं। दरअसल जो लोग success चाहते हैं, उन्हें यह पता नहीं होता कि पर्स्नालिटी के विकास में ही ऐसी बहुत सारी खूबियां छुपी होती हैं, जिन्हें सुधार लेने मात्र से ही हम कई सारी असफलताओं और विफलताओं को सफलता में बदल सकते हैं।

personality development tips – जानने से पहले यहां यह जान लेना सही होगा कि personality होती क्या है। ‘personality’  इंसान की उस सम्पूर्ण छवि का नाम होता है, जो वह दूसरों के सामने बनाता है।’

हर इंसान की personality को दो चीजे बहुत ज्यादा प्रभावित करती है। वे है उस इंसान का आत्मसम्मान(self concept) और शारीरिक छवि(body image)

मनोविज्ञान में आत्मसम्मान शब्द का प्रयोग किसी भी इंसान के सम्पूर्ण भावनात्मक मूल्यांकन के लिए किया जाता है.  हर व्यक्ति का अपने आप के प्रति एक नजरिया होता है.  आत्म सम्मान को अपने अंदर झांकने तथा मूल्यांकित करने के रूप में भी जाना जाता है जिसमे योग्यता, गर्व , गुण की भावनाये शामिल होती है.  इंसान के आत्म सम्मान का आत्म चेतना से काफी गहरा सम्बन्ध होता है.  .. famous psychologist स्मिथ और मैकी के ने कहा है ” जो कुछ हम अपने बारे में सोचते है वह आत्मसम्मन होता है, आत्म सम्मान खुद का सकारात्मक या नकारत्मक मूल्यांकन होता है, जैसा हम महसूस करते है (The self concept what we think about the self, self esteem is the positive or negative evaluations of the self, as in how we feel about”.)

शारीरिक छवि का अर्थ

शारीरिक छवि का मतलब किसी भी इंसान का  अपने शरीर के प्रति सोचना, विचार करना, और महसूस करना है।  सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया के मनोविश्लेषक पॉल सिल्डर( paul schilder) ने अपनी किताब ‘ द इमेज एंड अपीयरेंस ऑफ़ ह्यूमन बॉडी'( The image and appearance of human body) में शारीरिक छवि का जिक्र किया है.  इंसान की शारीरिक छवि उसके खुद के अनुभवो तथा अनेक समाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों का फल होता है.  इंसान के दिलो दिमाग में खुद की शारीरिक छवि दुसरो के दिमाग से बनी हुई शारीरिक छवि के जैसी या उससे अलग भी हो सकती है.  आत्म सम्मान और शारीरिक छवि बहुत सी चीजो से प्रभावित होती है जिसमे से कुछ निचे दिए गए है

1. यौवन तथा विकास (puberty and development) – जब बच्चा शारीरिक विकास की दूसरी अवस्था मतलब किशोरावस्था में आता है तो उस अवस्था में तेजी से शारीरिक विकास शुरू हो जाता है. इस अवस्था में किशोरों में बहुत से शारीरिक बदलाव आते है जब वो इन बदलावों को देखते है तो सही मार्गदर्शन न होने के कारण अपने शरीर की तुलना तुलना दुसरो से करते है।  अगर इस समय  उन्हे अपने  आपमे कोई कमी मिलती है तो वो निराश और चिंतित हो जाते है।  उनको इस बात का पता नही होता की हर एक इंसान का विकास अलग अलग रूप में होता है अतः किशोरावस्था आत्म सम्मान एवं शारीरक छवि को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है

 

2. मीडिया तथा दूसरे बाहरी प्रभाव( media image and other outside influences) –  हम रोज टीवी , मैगज़ीन , अख़बार में बहुत से खूबसूरत लोगो को देखते है।  चाहे बच्चा युवा अवस्था मे हो या किसी भी उम्र का हमे  हीरो हीरोइन की छवि बहुत प्रभावित करती है।  हम  इन को अपना रॉल मॉडल समझने लगते है और खुद भी वैसा ही बनने की कोशिश करते रहते है। आज के जमाने मे यह हमारी ज़िंदगी को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।

3. परिवार दोस्त और स्कूल ( family friends and school) – परिवार दोस्त और स्कूल भी हमारे आत्म सम्मान एवं शारीरिक छवि को प्रभावित करता है। कई बार घर के सदस्य मज़ाक मज़ाक मे आपस मे एक दूसरे को उपनामो जैसे  मोटू पतलू आदि नामो से बुलाने लगते है जिससे उसमे नकारत्मक छवि उत्पन्न होती है।  स्टूडेंट्स अपने दोस्तों को मज़ाक में किसी दूसरे नाम से बुलाने लगते है जिससे दूसरे के मन को ठेस पहुचती है और वो निराश हो जाता है।

4. चिढाना ( teasing) – कई बार लोग दुसरो पर कमेंट करते है और चिढ़ाना शुरू कर देते है इस तरह की क्रियाओ से बच्चों के मन मे हीन भावनाये आती है।

5. दुर्घटना ( Accident) – यदि किसी दुर्घटना से व्यक्ति शारीरिक रूप से बीमार हो जाता है तो वो अपनी किस्मत को कोसने लगता है और वो हर समय अपने शरीर  के बारे में सोचता है और चिंतित रहता है अतः कई बार दुर्घटनाये भी शारीरक छवि को नुकसान पहुचती है।

6. बीमारी या बुढ़ापा( Disease and ageing) – लम्बे समय तक बीमार रहना या बुढ़ापे के कारण शरीर कमजोर हो जाता है और जब वह अपनी तुलना दुसरो से करता है तो निराश हो जाता है। उसमे नकारत्मक छवि पैदा होने लगती है।  बुढ़ापे के कारण शरीर कमजोर हो जाता है और वो दुसरो पर निर्भर रहने लगता हैं । ऐसी अवस्था में व्यक्ति के आत्म सम्मान और शारीरक छवि को ठेस पहुचती है.

कैसे आप आत्मसम्मान(self concept) और शारीरिक छवि(body image) को improve कर सकते है;

1 स्वस्थ शारीरिक छवि (healthy body image) –  स्वस्थ शारीरिक छवि मतलब अपने  खुद के गुणों और शरीर को वास्तविक रूप में स्वीकार करना चाहिए ताकि हम अच्छा और ख़ुश महसूस कर सके। हर इंसान को शारीरिक विकास के  अलग अलग गुणों के बारे में जानना चाहिए और ये समझना चाहिए कि सभी लोगो का विकास एक समान नही हो सकता। सकारत्मक (पॉजिटिव) शारीरिक विकास पर बल देना चाहिए तथा नकारात्मक( नैगेटिव) शारीरिक छवि से दूर रहना चाहिए।

2 मार्गदर्शन (guidance) –  इंसान की युवा अवस्था में बहुत से परिवर्तन आते है जिन्हें देख कर वह कई बार चिंतित हो जाते है। इस दौरान माता पिता को अपने बच्चों का खास ध्यान रखना चाहिए।  समय-समय पर माता-पिता को बच्चों का मार्ग दर्शन करते रहना चाहिए। युवा अवस्थ में सभी लोग बहुत जिज्ञासु होते है।  सही मार्ग दर्शन न होने से वो रह से भटक सकते है…

3 टीका-टिप्पणी न करे( ignore comment) –  सभी लोगो को ध्यान रखना चाहिए की वह किसी की शारीरिक बनावट को लेकर कोई टिप्पणी नही करे। फैमिली में दोस्तों में किसी के चिढ़ाने से बच्चों में मन पर अच्छा प्रभाव नही पढता। हम सभी को ध्यान रखना चाहिए की बच्चों या बड़ो किसी को भी न चिढ़ाया जाए।

4 स्वस्थ आदते (health habits) – स्वस्थ आदते शारीरिक छवि और आत्म सम्मान को सुधरने में मददगार होती है। हमे सूर्य उदय से पहले उठना चाहिये नियमित रूप से शौचालय जाना चाहिए और रोज योग करना चाहिए.

5 संतुलित आहार (balance diet) – इस बात को कोई झुठला नही सकता की संतुलित आहार से स्वस्थ और मजबूत शरीर का बनता है अतः सभी को आहार सम्बंधित स्वस्थ आदतो को अपनाना चाहिए। आजकल जंकफूड और फ़ास्ट फ़ूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है जो शारीर के लिए हानिकरक है । संतुलित आहार शारीरिक छवि तथा आत्म सम्मान को बेहतर बनने में मददगार होता है.

6 अपंग व्यक्तियो के प्रति संवेदनशीलता( sensitivity to disability person) – समाज में अपंग या शारीरिक रूप से असमर्थ व्यक्ति को हीन भावना से देखा जाता है। ऐसा करना उनके प्रति अन्याय है।  हमे ऐसे व्यक्तियो के प्रति सहानभूति रखनी चाहिए उन्हें भी समाज का हिस्सा मानना चाहिए ताकि उनके आत्म सम्मान को ठेस न पहुचे अगर कोई अपंग व्यक्ति दिखे तो उसकी जहा तक हो सके उसकी मदद करनी चाहिए.

7 आशावादी और सकारत्मक नजरिया( optimistic and positive attitude) – व्यक्ति को हर एक स्थिति में सकारत्मक और आशावादी नजरिया अपनाना चाहिए।  उसे यह जानना चाहिए कि वो किस प्रकार खुश रह सकता है और अपने लक्ष्य तक कैसे पहुँच सकता है।  अपनी सीमाओ को ध्यान में रखते हुए व्यक्ति को सकारात्मक नजरिये से लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए सकारात्मक नजरिये तथा स्वस्थ जीवन शैली दोनों आत्म सम्मान के लिए आवश्यक बिंदु माने जाते है.

8 स्वयं का आदर करे( respect yourself)  – आत्मसम्मान और शारीरिक छवि के लिए जरुरी है कि व्यक्ति खुद का आदर करे।  अपने शरीर को सबसे अच्छा और आदर्श शरीर समझे। ऐसा करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति ही अपनी ज़िंदगी मे रचनात्मक योगदान दे सकता है.

9 लक्ष्य निर्धारित करना (set goals) – अगर हमे अपने आप मे कोई ऐसी चीज़ दिखाई देती है जिससे की सुधार जा सकता है तो उसके लिए लक्ष्य निर्धारण कीजिये और उसी के अनुरूप काम करे। जैसे अगर आपको शारीरिक रूप से फिट होना है तो पहले योजना बनाइये और योग करे और संतुलित खाना खाए लक्ष्य की प्राप्ति तक अपनी यही कोशिश जरी रखे।

10 पेशेवर से मदद ले (take professionals help) – शारीरिक छवि और आत्म सम्मान में सुधार के लिए किसी प्रोफेशनल की मदद ले या उससे राय ले सकते है। जब कोई तनाव में रहता है और उसके आत्मविश्वास में कमी हो जाती है तो उस अवस्था में एक प्रोफेशनल की सलाह बहुत मददगार साबित होती है…

अंत मे एक बात ध्यान रखे;

हर एक इंसान एक पत्थर की तरह है जिसमें एक सुन्दर मूर्ति छिपी होती  है, जिसे सिर्फ एक अच्छे शिल्पी की आँख देख पाती है। वह शिल्पी उसे तराश कर एक सुन्दर मूर्ति में बदल सकता है। क्योंकि मूर्ति तो पहले से ही पत्थर में मौजूद होती है शिल्पी तो बस उस फालतू पत्थर को जिसमें मूर्ति ढकी होती है, एक तरफ कर देता है और सुन्दर मूर्ति प्रकट हो जाती है। माता-पिता(parents), शिक्षक(teacher), और समाज(society ) किसी भी इंसान  को इसी प्रकार सँवार कर खूबसूरत personality प्रदान करते हैं।

article By राजेश कुमार, psychologist

phd in psychology

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