एग्जाम में अच्छे नंबर लाने के प्रेशर से कैसे डील करें.

चिंता होना एक आम बात है लेकिन यही चिंता जब बढ़ जाती है तो हमारे दिमाग पर कब्ज़ा कर लेती है और हमारी सोचने समझने की शक्ति कम होती जाती है. जिसे हम स्ट्रेस कह सकते है. एग्जाम टाइम शुरू हो गया है और इस समय बच्चों में बहुत से डर और चिंताएं पैदा हो जाती है जिनमे से एक डर है अच्छे नंबर न आये तो? आज हम इस आर्टिक्ल में इसी डर पर बात करेंगे और जानेंगे कि इसे कैसे दूर कर सकते है.

 

सबसे पहले हम जानेंगे  एग्जाम स्ट्रेस के लक्षण

Symptoms of examination anxiety in hindi

 

  • कंफ्यूज रहना
  • दोस्तों से बात न करना
  • मूड ठीक न रहना
  • फैसले न कर पाना
  • पेट की समस्या होना
  • सर दर्द या शरीर में कही और दर्द होना
  • नाख़ून चबाना
  • मोटिवेशन न होना
  • ठीक से नींद न आना
  • ध्यान केंद्र न कर पाना

 

इन सभी लक्षणों के आधार पर हम कह सकते है कि एक स्टूडेंट एग्जाम के समय एग्जाम स्ट्रेस से गुजर रहा है.

 

ये एग्जाम स्ट्रेस भी कई कारणों से हो सकता है जैसे:-

  • फेल होने का डर
  • तैयारी न होना
  • कम समय होने का डर
  • यह सोचना की वह अच्छा नही कर पायेगा
  • जो पढ़ रहे है वो सही से समझ न आना
  • पारिवारिक दबाव या उनकी उम्मीदे
  • पढने में किसी की जरूरत महसूस करना और उसका आपके साथ न होना.
  • सिर्फ अच्छा करने के चाह रखना
  • दुसरो की पढाई पर ध्यान रखना

 

एग्जाम स्ट्रेस

 

 

ये तमाम कारण है जिनसे एक स्टूडेंट स्ट्रेस फील करता है। आज इनमे से हम एक करण पर बात करेंगे जो है अच्छे नंबर न आने का डर या पेरेंट्स की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने का डर.  तो आइये जानते है की इस इस डर से हम कैसे छुटकारा पा सकते है।

 

How to deal with marks expectations

 

खुद पर विश्वास रखे — कई बार स्टूडेंट इतना दबाव महसूस करते है कि अच्छी तैयारी के बाद भी खुद पर भरोसा नही कर पाते कि वह अच्छे नंबर ला सकते है. अगर आपकी तैयारी अच्छी है तो आप एग्जाम की प्रेक्टिस कीजिये और खुद को नंबर दीजिये.  इससे आपका खुद पर विश्वास बढेगा.

 

पेरेंट्स से बात करे— इस बात के कोई शक नही है की हर पेरेंट्स चाहते है  उनके बच्चे एग्जाम में अच्छे नंबर लाये और इस कारण वो अनचाहा तनाव बच्चो को दे देते है. इससे बचने के लिए पेरेंट्स और बच्चो को आपस में बात करनी चाहिए जैसे कितनी तैयारी हो गई है?  कितनी बाकि है या रिविजन कैसी चल रही है, कोई समस्या आ रही है तो अपने पेरेंट्स से शेयर करे. आदि

 

बैकअप प्लान रखे – बच्चे अक्सर अपना बैकअप प्लान रखना भूल जाते है या बनाते ही नही है।  बैकअप प्लान सिर्फ एक हौसला होता है कि जो मैं सोच रहा हूँ वैसा नही हुआ तो एक दूसरा विकाल्प भी मेरे पास मौजूद है. इससे जरुर आपका तनाव कम होगा.

 

थेरेपिस्ट से बात करे – इस तनाव और डर से निकलने के लिए आप अपने स्कूल काउंसलर से बात कर सकते है या फिर manochikitsa.com पर जाकर अपनी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकते है जिसके बाद थेरेपिस्ट आपको कॉल करेंगे और पर्सनल काउन्सलिंग  से आपके तनाव को दूर करने में मदद करेंगे.

 

माइंड मैप बनाये – माइंड मैप तनाव को दूर करने की एक बहुत अच्छी मनोविज्ञानिक ट्रिक है जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है

 

पढाई पर फोकस करे, न की रिजल्ट पर – इन्सान का व्यक्तित्व है कि वह काम पर नही काम से मिलने वाले फल पर ज्यादा ध्यान देता है।  यह भी कुछ ऐसा ही है आपको अपनी परीक्षा पर ध्यान लगाना चाहिए न की अपने परिणाम पर, परीक्षा अच्छी होगी तो परिणाम भी अच्छा ही होगा.

 

दोस्तों हमे उम्मीद है , आपको हमारा लेख पसंद आया होगा जो आपके तनाव को कम करने में आपकी मदद करेगा. साथ ही आप पर्सनल काउन्सलिंग के जरिये एक्सपर्ट से फ़ोन पर या चैट पर  बात कर सकते है और अपने डर को पूरी तरह से दूर कर सकते है।  इसके लिए CBSE ने भी सभी स्टूडेंट्स के लिए एक Helpline Number नंबर जारी किया है जिसके जरिये छात्र counselor से बात करके अपनी समस्याओ का हल जान सकते है।

CBSE COUNSELING NUMBER – 1800 11 8004

दोस्तों इस लेख को शेयर करना न भूले और आपका कोई सवाल या अनुभव हो तो कमेंट बॉक्स में हमसे शेयर कर सकते है.

 

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  1. Jagdish Kumawat 25/02/2020

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