विटामिन डी लेना क्यो जरूरी है और इसकी कमी के सामान्य रिस्क फैक्टर्स

विटामिन डी एक सनशाइन विटामिन है, ये फैट-सॉल्युबल (वसा मे घुलनशील) विटामिन है और हमारे लिये बहुत जरूरी है। सूरज की किरण से विटामिन डी को प्राप्त किया जाता है और इसे कई ओर तरीके से भी प्राप्त किया जा सकता है जैसे कुछ खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट लेकर विटामिन डी की जरूरी मात्रा को लिया जा सकता है। एफडीए के अनुसार इसकी दैनिक आवश्यकता 400 IU यानि की 10 mcg होती है, हालांकि इसकी दैनिक आवश्यकता उम्र और इसकी कमी के हिसाब से न्यूनतम 400 IU से अधिकतम 4000 IU तक हो सकती है। शकहारियों के लिये इसकी कमी पूरी करने का सबसे अच्छा स्त्रोत होगा इसे सूरज की किरणों मे खड़े होकर प्राप्त करना या सप्लीमेंट लेकर इसकी दैनिक आवश्यकताओ की पूर्ति करना। क्योकि शाकाहारियों के लिये खाद्य पदार्थों से इसकी जरूरी मात्रा की पूर्ति करना मुश्किल हो सकता है क्योकि विटामिन डी के शाकाहारी स्त्रोतो मे यह बहुत ही कम मात्रा मे पाया जाता है। विटामिन डी के शाकाहारी स्त्रोत विटामिन डी युक्त दूध,विटामिन डी फोर्टिफाइड पदार्थ जैसे संतरे का जूस, बादाम का दूध, सोय मिल्क, मशरूम। मांसाहारियों के लिये सबसे अच्छे स्त्रोतो मे कॉड लिवर ऑइल, मछलिया जैसे स्वोर्डफिश,सालमन, टूना, ट्राउट, व्हाइटफिश, इसके अलावा अंडे की जर्दी आदि।

सूरज की किरणों से विटामिन डी की प्राप्ति vitamin d from sunlight

how long time it take to get vitamin d from sunlight exposure सूरज से विटामिन डी प्राप्त करने के लिये कितना समय धूप मे खड़े रहना होगा

हमारी बॉडी सूरज की किरणों से इस विटामिन को बनाने मे सक्षम होती है इसके लिये आधे घंटे तक बॉडी को सूरज की किरणे लेनी होती है, सूरज से निकलने वाली UVB (अल्ट्रा वायलट बी) किरणे विटामिन डी बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, आपकी बॉडी सूरज की किरणों से कितना विटामिन डी बनायेगी ये मौसम, समय और आपकी लोकेशन पर निर्भर करता है, जैसे गर्मी के समय ज्यादा धूप पड़ती है , सुबह 12 बजे के आसपास धूप ज्यादा होती है, क्या आपकी लोकेशन मे धूप अच्छी निकलती है,   

विटामिन डी हमारे लिये क्यो जरूरी है benefits of vitamin d in hindi

ये विटामिन ना सिर्फ हमारी हड्डियों और दाँतो को मजबूत बनाने के लिये जरूरी है बल्कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और दिमाग को मजबूत बनाने के लिये भी बहुत जरूरी है, जिससे हम स्वस्थ रहते है। शरीर मे कैल्सियम को सोखने के लिये विटामिन डी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसकी कमी से हमारी हड्डियाँ कमजोर हो जाती है, बच्चो मे रिकेट्स (सूखा रोग) होने का खतरा बढ़ जाता है, बड़ो यानि की व्यस्कों मे इसकी कमी से हड्डियाँ मुलायम सी हो जाती है जिसे ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) कहा जाता है, इससे हड्डियों की डैन्सिटि (bone density) कम हो जाती है, ये ज्यादातर वृद्ध लोगो मे और रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद महिलाओ मे देखा जा सकता है। ये विटामिन कैंसर से बचाव भी कर सकता है, ये कोशिका वृद्धि को नियंत्रित करता है, ये कैंसर वाली कोशिकाओ को बढ़ने से रोकता है।ये विटामिन डायबिटीज (मधुमेह) के रिस्क को कम करता है।  डायबिटीज (मधुमेह) दो प्रकार के होते है, ये दोनो से ही शरीर की रक्षा करता है, विटामिन डी हमारे हृदय और दिमाग के लिये भी बहुत अच्छा होता है। पुरुषो मे टेस्टोस्टेरोन की कम मात्रा को बढ़ाने मे भी ये बहुत सहायक है, टेस्टोस्टेरोन पुरुषो का प्रमुख हॉरमोन होता है जो पुरुषो की वृद्धि और उन्हे मर्दो वाले गुण प्रदान करता है।

विटामिन डी की कमी के सामान्य रिस्क फैक्टर्स (common risk factors behind vitamin d deficiency)

कई लोगो मे इस विटामिन की कमी के रिस्क काफी ज्यादा होते है। ऐसे लोगो मे शामिल है वृद्ध लोग, वो लोग ज्यादातर घरो मे ही रहते है और बाहर कम निकलते है, वे लोग जो मछलिया नहीं खाते, वे लोग जो डेयरी पदार्थो का सेवन नहीं करते, रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद महिलाओ मे इस विटामिन की कमी के रिस्क बढ़ जाते है, ज्यादा मोटापे वाले लोग भी इसकी कमी से पीड़ित हो सकते है, भूमध्य रेखा से दूर रहने वाले लोग जहां साल भर सूरज कम रहता है, जिन लोगो की चमड़ी डार्क रहती है। इसके अलावा जो लोग सनस्क्रीन क्रीम का ज्यादा प्रयोग करते है उन लोगो मे भी इस विटामिन की कमी होने के रिस्क हो सकते है क्योकि सनस्क्रीन सूरज से निकलने वाली uvb (अल्ट्रा वायलट बी) किरणों को रोकती है ये किरणे शरीर मे विटामिन डी बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सनस्क्रीन इन्हे रोककर शरीर की विटामिन डी बनाने की क्षमता को प्रभावित करता है।

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