मानसिक जागरूकता है मानसिक बिमारियों से लड़ने के लिए पहला कदम

आज कल की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हम सब अच्छे करियर , जॉब, पैसे और दिन प्रतिदिन बढती तकनीक के पीछे भाग रहे है जिस वजह से हम अपने स्वास्थ्य की तरफ ध्यान नही दे पाते फिर चाहे वे शारीरिक स्वास्थ्य हो या मानसिक स्वास्थ्य. इस पर एक कहावत भी कही गई है “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है.

यदि हम बात करे जारुकता की तो शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर लोगो में काफी हद तक जागरूकता आ चुकी है. लोग कई घातक बीमारियों जैसे कैंसर, ह्रदय रोग, एड्स आदि को लेकर खुल कर बात करते है और जानकारी प्राप्त करते है. किस डॉक्टर के पास जाना है या कौन सा ट्रीटमेंट लेना है आदि जैसे सवालों के जवाब जानना चाहते है. वही दूसरी तरफ बात करे मानसिक स्वास्थ्य कि तो आज भी कई प्रकार की भ्रांतियां लोगो के मन में है जैसे बीमारी (परेशानियों) को लेकर, डॉक्टर के बारे में , उपचार के बारे में और कई बार लोग इसलिए भी मानसिक परेशानी नही बताते क्योंकि वो सोचते है कि लोग क्या सोचेंगे, किसी को पता चलेगा तो बदनामी होगी. इसलिए कई लोग साइकेट्रिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के पास जाने के बजाये बाबा या मोलवी आदि को ज्यादा तरजीह देते है जिससे कई बार परेशानी और भी बढ़ जाती है.

 

बात करे आकड़ों की तो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (निमहंस) के अध्ययन के अनुसार भारत में मानसिक बिमारियों का आकड़ा चौंकाने वाला है। भारत की सामान्य आबादी में से 13.7 प्रतिशत लोगो को विभिन्न मानसिक बीमारियों से पीड़ित होने का अनुमान बताया गया है; इसमें से 56 मिलियन लोग डिप्रेशन और 38 मिलियन लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर जैसे फोबिया, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, पैनिक डिसऑर्डर से पीड़ित है. बात करें गंभीरता की तो इसमें से 10.6 प्रतिशत लोगो को तत्काल इलाज की आवश्यकता है।

 

केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक देश को 11,500 मनोचिकित्सकों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या 3,500 है। संपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल 7,000 है जिसमें नैदानिक ​​मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक सामाजिक कार्यकर्ता और मनोवैज्ञानिक नर्स शामिल हैं, जबकि वास्तविक आवश्यकता 54,750 है।

 

क्या है मानसिक स्वास्थ्य – mental health in hindi

मानसिक स्वास्थ्य हमारे psychological, emotional और social well-being को दर्शाता है. दुसरे शब्दों में कहे तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य हमारे मन, व्यवहार और सोच पर निर्भर करता है. जितना अच्छा हमारा मन, खुद के और दुसरो के प्रति व्यवहार , अपने और दुसरो के प्रति जितनी हमारी सोच पॉजिटिव रहेगी, जितना अच्छे से हम समाज समायोजित कर पाएंगे उतना अच्छा हमारा मानसिक स्वास्थ्य रहेगा.

जैसे- जैसे हमारी जिंदगी बढती है हमारे सामने नई चुनौतिया आती रहती है जो हमे कई बार परेशान करती है और हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है किसी पर कम तो किसी पर ज्यादा. आइये जानते है मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाले मुख्य कारण क्या है :-

 

Biological:-

मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों में क्षति या किसी दुर्घटना के कारण सिर के किसी हिस्से पर चोट लगने के कारण कई तरह की मानसिक समस्याएं पैदा होती है.

 

Social and environmental :-

भारी गहरा सदमा,किसी करीबी की मृत्यु या उससे अलग होना, घर में झगड़ो का माहौल होना आदि भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य में नकारत्मक असर डालते है.

 

psychological

भावनात्मक और शारीरिक पीड़ाएँ , चिंता, अकेलापन, उपेक्षा, सांस्कृतिक और सामाजिक अपेक्षाएं यौन दुर्व्यवहार आदि भी मानसिक रोगो की उत्पत्ति में योगदान देते है.

 

असल में मानसिक परेशानिया होना भी दूसरी बीमारियों की तरह ही है. यह सभी लोगो को हो ऐसा जरूरी नही लेकिन सभी इसके निशाने पर रहते है और इसका इलाज भी दूसरी बीमारियों की तरह संभव है.

 

जागरूकता की जरूरत

मानसिक स्वास्थ्य से जुडी कई संस्थाए जैसे W.H.O, A.P.D, World Mental Health Federation आदि अलग अलग तरीके से जागरूकता के अभियान चला रही है जिससे दुनिया भर के लोगो को जागरूक किया जा सके इसलिए हर साल मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह मनाया जाता है जिसमें कई प्रकार के प्रोग्राम आयोजित किये जाते है. इस साल ये सप्ताह 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक मनाया गया है जिसकी थीम है ; “Time to change: Let’s Find Mental Health Discrimination”

हर संस्था अपनी तरह से अलग अलग प्रोग्राम आयोजित करती है जैसे पब्लिक मीटिंग, नुक्कड़ नाटक संगोष्ठी सेमिनार आदि.

 

मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता में भारत भी अपना अहम् योगदान निभा रहा है. भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कई प्रोग्राम आयोजिक किये जा रहे है जिनमे युवा, बुजुर्ग, बच्चे महिलाएं सभी योगदान दे रहे है. देश में यूनिवर्सिटीज , स्कूल, एन.जी.ओ और सोशल सोसाइटीज अलग अलग प्रोग्राम आयोजित करती है जिससे लोगो को जागरूक किया जा सके. कई संस्थाए इसके लिए सोशल मीडिया का भी सहारा ले रही है जिससे कम समय में अपनी बात को ज्यादा लोगो तक पहुँचाया जा सके.

 

आईये हम भी अपने स्तर पर इस बारे में जानकारी हासिल करे और इसे अपने करीबियों तक पहुंचाए ताकि एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई जा सके.

 

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About author 

मानसिक स्वास्थ्य

 

Graduated and post-graduated in Applied Psychology from the University of Delhi, Currently working as a school counselor at Hindon Public Sr Sec School.

 

 

 

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